रोग, कारण और निदान
रोग, कारण और निदान ~~~~~~~~~~~~~~~ धर्मार्थकाममोक्षाणाम् आरोग्यं मूलमुत्तमम् । तस्मात् रोगापहर्तारः श्रेयसो जीवितस्य च ॥ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मूल उत्तम आरोग्य है, इसलिये मोक्ष प्राप्ति के लिए भी एवं जीवन रक्षा के लिए भी रोग का नाश कर आवश्यक है । हमारे सनातन धर्म में उक्त चार पुरुषार्थ कहे गए हैं । किन्तु इस विषय में ध्यान रखना चाहिए कि अर्थ और काम भी पुरुषार्थ हैं, अतः इनकी ही प्राप्ति करना चाहिए बाकी धर्म और मोक्ष से हमें क्या लेना देना ? ऐसी सोच मनुष्य के पतन का मूल कारण है । यदि धन संग्रह ही पुरुषार्थ होता तो चोर, लुटेरे आदि भी धन संग्रह करते हैं किन्तु यदि यह पुरुषार्थ है तो जेल की हवा क्यों खानी पड़ती है ? यदि स्त्री विषयक काम को ही यहाँ गृहस्थ धर्म का मूल पुरुषार्थ माना जाये तो पशु-पक्षी भी अपनी-अपनी स्त्रियों के साथ पुरुषार्थ से संपन्न हैं, बलात्कारी, व्यभिचारी भी पुरुषार्थ से युक्त हैं फिर उन...