अग्नियां
अग्नियां : - मेरे द्वारा पहले अनन्त ब्रह्माण्ड की सृष्टियां किस प्रकार हुई थी ? इस पर प्रकाश डालते हुए, उनचास मरुतों के आधार पर ही अग्नि सहित, पृथ्वी, जल एवं आकाश तत्त्व के भी उनचास - उनचास भेद किये थे, (लिंक नीचे दिया जा रहा है) परन्तु कोई प्रमाण नहीं मिल सका था, अब उन्हीं अग्नियों का लिंग पुराण में उनचास होने का प्रमाण तो मिला लेकिन उनके नाम नहीं मिले तथापि प्रयत्न किया है कि उन्हें सामने ला सकूं । यदि किसी भी विद्वान को उनचास अग्नियों के नाम प्राप्त होते हैं तो प्रमाण सहित प्रस्तुत करने की कृपा करें । ओ३म् !) विसृज्य सप्तकं चादौ चत्वारिंशन्नवैव च । इत्येते वह्नयः प्रोक्ताः प्रणीयन्तेऽध्वरेषु च ॥ आदि में सप्तक का त्याग करके कुल उनचास अग्नियां कही गई हैं । ये अग्नियां यज्ञों में आराधित हैं । लिंग पु. पूर्वा.६/३ । इस श्लोक के अनुसार यज्ञाग्नियां आवाहनीय, गार्हपत्य एवं दक्षिण ये तीन अग्नियां ही यज्ञ के उपयोग में आती हैं, (इन प्रधान अग्नियों की सहायक तीन अग्नियां भी हैं —सभ्य, आवसथ्य, औपासन) इस आधार पर इन्हीं तीनों अग्नियों के उनचास भेद होने चाहिए, ...